स्वीकार

बहुत छोटा सा शब्द है लेकिन बहुत अहम है

जिसनें स्वीकार कर लिया वो

विपरीत परिस्थितियों में भी खुश है और,

जिसनें नहीं किया वो सब कुछ पाकर भी दुखी है।

शब्द

शब्द चाहत हैं चीख हैंं

शब्द ही बैर हैं मीत हैं,

शब्द तल्ख हैं प्रीत हैं

शब्द ही नज्म हैं टीस हैं,

शब्द सुकून हैं खीझ हैं

शब्द ही जंग हैं जीत हैं

शब्दों में हर अर्थ छिपा

शब्दों का है खेल बड़ा।

 

लघु कविता- रिश्तों की बगिया

रिश्तों की ये बगिया यूं ही महकती रहे

इसीलिए तो हम और आप बार-बार मिलते हैं

थोड़ा हंसते हैं थोड़ा मुस्कुराते हैं

दो पल ही सही साथ में तो बिताते हैं

जिंदगी एक गुलदस्ता है और हम इसके फूल

इसी बहाने ही सही हम बार-बार खिलते हैं।

 

 

जिंदगी

जो लिख लूं इसे तो इक नज्म है ये जिंदगी

जो जी लूं इसे तो इक कश है ये जिंदगी

जो थोड़ा लिख लूं या थोड़ा जी लूं तो

ऐसा लगता है जैसे इक कशमकश है ये जिंदगी।

हिन्दी दिवस

मैं बेटी हिन्दुस्तान की और

हिन्दी मेरी बोली है

दिलों को जीत ले जो शब्दों से

इतनी मीठी मेरी ये बोली है

मेरी पहचान, मेरा सम्मान,

मेरा गर्व, मेरा गुमान,

मेरे वतन की जुबान

मेरे देश की आन,बान,शान

मेरे हिंद की खुशबू

ये मेरी हिन्दी बोली है।