हिन्दी दिवस

मैं बेटी हिन्दुस्तान की और

हिन्दी मेरी बोली है

दिलों को जीत ले जो शब्दों से

इतनी मीठी मेरी ये बोली है

मेरी पहचान, मेरा सम्मान,

मेरा गर्व, मेरा गुमान,

मेरे वतन की जुबान

मेरे देश की आन,बान,शान

मेरे हिंद की खुशबू

ये मेरी हिन्दी बोली है।

मेरे बस में न था

मेरे बस में न था दुनियां को बदलना

मैंने सारी ऊर्जा खुद को बदलनें में लगा दी

खुशी तो तब बेशुमार हुई जब

मेरे बदलते ही सारी दुनियां अपने आप ही बदल गयी।