मेरे बस में न था

मेरे बस में न था दुनियां को बदलना

मैंने सारी ऊर्जा खुद को बदलनें में लगा दी

खुशी तो तब बेशुमार हुई जब

मेरे बदलते ही सारी दुनियां अपने आप ही बदल गयी।

कविता- वो जज्बाती पन्ने

महसूस किया जब प्यार है मुझको

न सोंचा न समझा बस बोल दिया मैंने

दिल में भरे मासूम जज्बाती पन्नों को

एक-एक करके उनके लिए खोल दिया मैंने

एक पल भी परवाह न की इस बात की

कि क्या कद्र होगी उनको भी मेरे जज्बात की

दिल में इतना प्यार भरा था उनके लिए

कि अब तो सब्र नें भी मुँह मोड़ लिया हमसे

महसूस किया जब प्यार है मुझको

न सोंचा न समझा बस बोल दिया मैंने

दिल रोया बहुत जब मिली हार मुझको

लेकिन फिर भी खुश थी मैं ये अहसास लेकर

प्यार सच्चा है मेरा क्योंकि बेवजह है

खुशकिस्मत हैं वो जिनको प्यार ऐसा मिला है

न मांगा न छीना बस प्यार उनको किया है

ये मासूम सा दिल बस उनको दिया है

महसूस किया जब प्यार है मुझको

न सोंचा न समझा बस बोल दिया मैंने

अगर बस में होता तो रोज कहती मैं उनसे

प्यार करते हैं तुमसे प्यार करते हैं तुमसे

लेकिन ये डर भी सताता है मुझको

कहीं खो न दूं उन्हें रोज-रोज तंग करके

बस वो खुश रहें और क्या चाहिए है मुझको

हां रब दे वो सबकुछ जो चाहिए है उनको।